DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए?

 

इस आर्टिकल में DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए? (डायरेक्ट आनलाइन स्टार्टर) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी की Dol starter क्या होता है, Dol starter की वायरिंग हम कैसे करते हैं, Dol starter में कितने प्रकार की वायरिंग होती है, जब Dol starter बन जाता है।

तो उसके बाद Dol starter से मोटर का कनेक्शन कैसे करते हैं, DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए? Dol starter से कितने प्रकार से मोटर का कनेक्शन होता है, Dol starter का कार्य सिद्धांत क्या होता है, Dol starter की ड्राइंग कैसे बनती है, Dol starter का   फायदा क्या है और इसका क्या नुकसान है, Dol starter का कनेक्शन करते समय हमें किन-2 चीजों का दिमाग में रखना चाहिए।

और भी बहुत से प्रश्नों का उत्तर इस आर्टिकल में आप जान जाएंगे और मेरा विश्वास मानिए की इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको और किसी आर्टिकल को पढ़ने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

क्योंकि इसी में आपको सम्पूर्ण जानकारी मिल जाएगी।

तो आइए एक-2 करके इन सभी जानकारी को विस्तार पूर्वक समझते हैं।

What is Dol starter | Dol स्टार्टर क्या है?

दोस्तों हमारे आपके आस-पास की चीजों में मोटर बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रखता है क्योंकि मोटर की ही सहायता से हम अपने बहुत से काम कर पाते है।

जैसे कि जमीन से पानी को निकालना, फैक्ट्री में लगी मशीनों को चलाना ये बिना मोटर के नहीं चल सकती है।

आजकल के समय में हमारे चारों तरफ जो भी उपकरण कार्य कर रहे है उनमें मोटर का बहुत ज्यादा योगदान होता है तो अब बात आती है कि मोटर का उपयोग तो होता है।

लेकिन उस मोटर को चालू कैसे करते है मोटर को चालू करने का क्या तरीका है क्योंकि किसी भी मोटर हम बिना स्टार्टर के नहीं चला सकते है तो आपको बता दूँ की इसीलिए हम Dol starter का उपयोग करते हैं।

यह स्टार्टर एक सामान्य स्टार्टर होता है इसका उपयोग हम मोटर को कहीं दूर से पावर सप्लाई देने के लिए करते हैं।

परन्तु Dol starter से हम 7.5 हॉर्स पावर (HP) से बड़ी मोटर को नहीं चला सकते अगर मोटर 7.5 हॉर्स पावर (HP) से बड़ी है तो हम इस स्टार्टर का उपयोग उस मोटर को पावर सप्लाई देने में नहीं करेंगे।

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इस स्टार्टर का उपयोग हम 7.5 हॉर्स पावर (HP) से ऊपर की मोटर पर नहीं कर सकते।

कुछ विशेष परिस्थितियों में बड़ी मोटरों को Dol starter से ही पावर सप्लाई दी जाती है।

जैसे जब किसी बड़ी मोटर को चलाना हो तो कुछ मैकेनिकल उपकरणों की सहायता से बड़ी मोटर को Dol starter से चला सकते हैं।

जैसे कि फ्लोट कपलिंग अगर हम मोटर में लगा दें तो बड़ी मोटर को Dol starter से चला सकते है।

किसी मोटर को चलाने के लिए दो चीजों की आवश्यकता होती है पहला होता है वोल्टेज दूसरा करंट परंतु वोल्टेज फिक्स (अपरिवर्तित) होता है इसका मान कम व ज्यादा नहीं हो सकता है।

लेकिन जो करंट होती है उसका मान कम अथवा ज्यादा होता रहता है और इसी से मोटर को सबसे ज्यादा नुकसान होता है क्योंकि मोटर की फुल लोड करंट से ज्यादा करंट अगर मोटर में चली जाएगी तो मोटर जल जाएगी।

Dol starter इसी हाई करंट को मैनेज करता है उसे कंट्रोल करता है और जितना करंट हम मोटर में जाने के लिए सेट कर देते है उतने से अधिक करंट मोटर में नहीं जाने देता है जिससे मोटर सुरक्षित बनी रहती है।

इसे भी पढ़े-

1- सिंगल फेज की मोटर का कनेक्शन कैसे होता है?

2- 3 फेज को मोटर से कैसे कनेक्ट करें?

Dol स्टार्टर का कार्य सिद्धांत

जब किसी इंडक्शन मोटर को 3 फेज की सप्लाई देते हैं तो सप्लाई देने से पहले इंडक्शन मोटर का रोटर स्थिर स्तिथि में होता है।

अब जैसे ही हम पावर सप्लाई को चालू करते हैं तुरंत इंडक्शन मोटर का रोटर स्थिर पोजीशन से रनिंग पोजीशन में चला जाता है।

लेकिन इस स्थिर पोजीशन से रनिंग पोजीशन में जाने में वह अपने फुल लोड करंट (FLC) का लगभग 8 से 10 गुना ज्यादा करंट लेता है।

अब अगर यह 8 से 10 गुना करंट सीधे मोटर में चला जाएगा तो मोटर की जो वाइंडिंग है वह इस हाई करंट को बर्दाश्त नहीं कर पाएगी और हो सकता है मोटर की वाइंडिंग जल भी जाए।

अब यदि हम मोटर की वाइंडिंग को जलने से बचाना चाहते हैं तो मोटर को सीधे पावर सप्लाई ना देकर एक स्टार्टर के माध्यम से पावर सप्लाई दें इससे यह फायदा होगा की स्टार्टर में जो थर्मल ओवर लोड रिले लगाई जाती है।

वह मोटर में हाई करंट जाने से रोकती है अब चूंकि Dol starter को लाइन के सिरीज में लगाया जाता है और इसमें जो इनपुट वोल्टेज होता है।

वह एक Coil के लिए 220 वोल्ट होता है इसी कारण से जब वोल्टेज कम हो जाता है तो करंट बढ़ जाता है।

इसमें ध्यान देने की बात यह है कि Dol starter का उपयोग बड़ी मोटरों में नहीं किया जाता है।

Dol starter के भाग

Dol starter के कई भाग होते है जैसे इसमें एक पावर की एमसीबी होती है और एक कंट्रोल की एमसीबी होती है।

एक पावर कांटेक्टर होता है और एक बाईमेटलिक ओवरलोड रिले होता है एक ऑन पुश बटन और एक ऑफ पुश बटन होता है इसके साथ-2 तीन इंडिकेटर होते हैं।

जिसमें से एक ऑन, दूसरा ऑफ और तीसरा ट्रिप के बारे में बताता है और इसके साथ-2 कुछ वायर का भी उपयोग किया जाता है इसकी वायरिंग करने के लिए। अब हम इसके पार्ट को एक-2 करके समझ लेते हैं।

DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए?

1- MCB- DOL स्टार्टर पार्ट में दो प्रकार की एमसीबी का उपयोग किया जाता है जिसमें से एक MCB कंट्रोल की MCB होती है इसकी करंट रेटिंग 2 एंपियर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

इसकी जगह हम फ्यूज का भी उपयोग कर सकते हैं और दूसरी MCB पावर MCB होती है जोकि मोटर को थ्री फेज की पावर सप्लाई देने के लिए उपयोग की जाती है।

यह MCB मोटर के सीरीज में होती है ध्यान रहे यह MCB मोटर के फुल लोड करंट के 2 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

2- पावर कांटेक्टर- जैसे नाम से पता चल रहा है यह एक पावर कांटेक्टर है इसका उपयोग हम मोटर को पावर सप्लाई देने के लिए करते हैं

क्योंकि मोटर को सीधे पावर सप्लाई नहीं दे सकते इसीलिए इसका उपयोग किया जाता है इसमें ऊपर और नीचे कनेक्शन करने के लिए तीन कांटेक्ट ऊपर और तीन कांटेक्ट नीचे होते हैं

पावर कांटेक्टर में जहां पर T1 T2 T3 लिखा होता है वहां पर ओवरलोड रिले को लगाते है

ऊपर जो मेन थ्री फेज सप्लाई की केबल होती है उसका कनेक्शन करते हैं और नीचे जिस केबल से मोटर को सप्लाई देते है उसको लाकर ओवरलोड रिले के नीचे वाले टर्मिनल में कनेक्शन कर देते हैं

ऊपर और नीचे कहां पर कनेक्शन करना है अगर आपको यह समझ में नहीं आ रहा है तो जहां पर 3 फेज की सप्लाई देनी है कांटेक्टर के ऊपर वाले टर्मिनल पर L1 L2 L3 लिखा होता है

जिसका मतलब होता है लाइन 1, लाइन 2, लाइन 3 और कांटेक्टर के नीचे वाले टर्मिनल पर T1 T2 T3 लिखा होता है इसका मतलब होता है टर्मिनल 1, टर्मिनल 2, टर्मिनल 3 इस कांटेक्टर में 2 प्रकार के कांटेक्ट होते हैं

पहला पावर का जो कि 3 फेज का होता है और दूसरा कंट्रोल का जोकि कंट्रोल वायरिंग करते समय उपयोग में आता है इसकी कण्ट्रोल सप्लाई सिंगल फेज (110 वोल्ट, 230 वोल्ट) की होती है

जब आप कांटेक्टर को खोल कर देखेंगे तो उसके अंदर एक सिलिकॉन स्टील की बनी कोर होती है जिसका आकार E l के आकार का होता है आप देखेंगे कि यह कोर दो भागों में कांटेक्टर में होता है

नीचे का जो भाग होता है उसमे क्वायल को पहनाया जाता है जब तक क्वायल में सिंगल फेज की सप्लाई नहीं आएगी तब तक जो 3 फेज की पावर सप्लाई L1 L2 L3 पर आ रही है वह T1 T2 T3 पर नहीं जाएगी अब जब क्वायल में सप्लाई दी जाती है

तो क्वायल के अंदर मैग्नेटिक फील्ड बनती है इससे सिलिकॉन स्टील की नीचे वाली कोर एक अस्थाई चुम्बक बन जाती है जो ऊपर वाली कोर को अपनी ओर खीचती है

और ऊपर वाली कोर से लगा हुवा जो प्लंजर होता है उसी में पावर सप्लाई बंद और चालू करने वाली किट जुडी होती है अब जब ऊपर वाला प्लंजर नीचे वाले प्लंजर से आकर चिपक जाता है

तो सप्लाई पास करने वाली किट भी चिपक जाती है और 3 फेज की सप्लाई L1 L2 L3 से T1 T2 T3 पर पहुंच जाती है और वह पावर सप्लाई मोटर के टर्मिनल पर पहुंच जाती है जिससे मोटर चालू हो जाएगी।

3- बाईमेटलिक ओवरलोड रिले यह एक थर्मल ओवर लोड रिले होती है यह बाईमेटलिक सिद्धांत पर काम करती है थर्मल ओवर लोड रिले में करंट को सेट करने का एक नांब होता है

इसमें बाईमेटलिक का मतलब होता है द्वि-धात्विक मतलब इसमें दो धातुाओं का उपयोग किया जाता है पहली धातु की पट्टी से करंट का प्रवाह किया जाता है

अगर करंट अपने जितना सेट किया है उससे ज्यादा प्रवाहित होती है तो उसके साथ में लगी हुई दूसरी धातु की जो पट्टी होती है उसका मेल्टिंग प्वाइंट पहली पट्टी से कम होता है

जब करंट ज्यादा फ्लो होती है तो कम मेल्टिंग प्वाइंट वाली जो मेटल की पट्टी होती है वह मुड़ जाती है जिससे रिले ट्रिप हो जाती है और कांटेक्टर की कंट्रोल सप्लाई कट जाती है

जिससे क्वायल को मिलने वाली सप्लाई बंद हो जाती है और क्वायल के अंदर का मैगनेट ख़तम हो जाता है और सिलिकॉन स्टील की कोर का जो मैगनेट होता है वह भी ख़त्म हो जाता है और इससे ऊपर का प्लंजर छूट जाता है

इस तरह सप्लाई पास करने वाली किट अलग-2 हो जाती है और मोटर को पावर सप्लाई मिलनी बंद हो जाती है।

इसे भी पढ़े-

1- रिवर्स फॉरवर्ड स्टार्टर कैसे बनाएं?

4- पुश बटन- जैसा की नाम से पता चल रहा है पुश बटन इसका मतलब होता है की ऐसा बटन जिसको दबाया जाता है

यह पुश बटन 2 रंगों में होता है पहला पुश बटन हरा रंग का होता है और दूसरा पुश बटन लाल रंग का होता है और इसमें 2 प्रकार के एलिमेंट लगे होते है हरा रंग का जो पुश बटन होता है

उसमे NO (नार्मल ओपन) का एलिमेंट लगा होता है और लाल रंग के पुश बटन में NC (नार्मल क्लोज) का एलिमेंट लगा होता है। हरा पुश बटन स्टार्टर को ऑन करता है और लाल रंग का पुश बटन स्टार्टर को बंद करता है। 

5- इंडिकेटर DOL स्टार्टर किस स्थिति में है मतलब वह ऑन है या ऑफ, या ट्रिप है इसकी जानकारी के लिए इंडिकेटर को लगाया जाता है इसमें लाल रंग का इंडिकेटर तब जलता है

जब DOL स्टार्टर ऑन होता है मतलब मोटर चल रही होती है और हरा रंग का इंडिकेटर तब जलता है जब DOL स्टार्टर ऑफ होता है मतलब मोटर बंद होती है और अंतिम इंडिकेटर पीला रंग का होता है

यह तब जलता है जब मोटर ओवर लोड होती है जिस कारण से मोटर में ज्यादा करंट जाने पर ओवर लोड रिले ट्रिप हो जाती है और पीला रंग का इंडिकेटर ऑन हो जाता है

अब अगर आप DOL स्टार्टर को ऑन करेंगे तो DOL स्टार्टर ऑन नहीं होगा DOL स्टार्टर को ऑन करने के लिए पहले थर्मल ओवरलोड रिले को रिसेट करना होगा

तब पीला रंग का इंडिकेटर बंद होगा और तभी DOL स्टार्टर ऑन होने के लिए हेल्दी होगा।

Dol starter की ड्राइंग

DOL स्टार्टर में 2 प्रकार की वायरिंग होती है जिसमे पहली वायरिंग से हम मोटर को 3 फेज की पावर पावर सप्लाई देते है जिससे मोटर चलती है इसे पावर वायरिंग कहते है

और दूसरी वायरिंग से हम मोटर को मिलने वाली पावर सप्लाई को कंट्रोल करते है इसका मतलब हुवा की स्टार्टर में लगा हुवा जो कॉन्टैक्टर (जो 3 फेज सप्लाई को पास करता है) होता है

उसकी कंट्रोल सप्लाई सिंगल फेज की होती है यानी 110 वोल्ट की या 230 वोल्ट की होती है उसको रिमोट (पुश बटन स्टेशन) से दूर से ऑन और ऑफ करते है।

यह सप्लाई कंट्रोल सप्लाई होती है कुल मिलाकर हम यह कह सकते है की मोटर स्टार्टर में दो प्रकार की वायरिंग की जाती है पहली पावर वायरिंग और दूसरी कंट्रोल वायरिंग।

Dol starter की कंट्रोल ड्राइंग

DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए?

ऊपर DOL स्टार्टर की कंट्रोल ड्राइंग दिखाई गई है इसमें कांटेक्टर को रिमोट से कंट्रोल करते है Dol starter में जो-2 उपकरण  का उपयोग होता है

उसमे MCB,ओवरलोड रिले,ऑफ पुश बटन,ऑन पुश बटन,कांटेक्टर और कांटेक्टर का एक NO कांटेक्ट होता है।

इसमें सिंगल फेज सप्लाई 1 नंबर से निकलकर 2 नंबर MCB के इनपुट में आएगा और 3 नंबर MCB के आउटपुट  से निकलकर 4 नंबर ओवरलोड रिले के NC पॉइंट पर जायेगा

और 5 नंबर NC पॉइंट से निकलकर 6 नंबर OFF पुश बटन में जायेगा और 7 नंबर ऑफ पुश बटन से निकलकर 8 नंबर ON पुश बटन में जायेगा

और 9 नंबर ON पुश बटन से निकलकर 10 नंबर कांटेक्टर के A1 पॉइंट पर जायेगा और कांटेक्टर के A2 पॉइंट 11 नंबर पर न्यूट्रल की सप्लाई आएगी

अब जब ON पुश बटन को हम दबाएंगे तो सिंगल फेज सप्लाई MCB से निकलकर ओवरलोड रिले में जाएगी फिर ओवरलोड रिले से निकलकर OFF पुश बटन में जाएगी

फिर OFF पुश बटन में से निकलकर ON पुश बटन में जाएगी और फिर ON पुश बटन से निकलकर कांटेक्टर की क्वायल पर आएगी

और दूसरे साइड पर न्यूट्रल आएगा तो कांटेक्टर एक बार तो ON होगा पर जैसे ही आप ऑन पुश बटन से ऊँगली हटाएंगे तुरंत कांटेक्टर ऑफ हो जायेगा

मतलब कांटेक्टर होल्ड नहीं होगा तो इसके लिए एक होल्डिंग सप्लाई देनी होगी यह सप्लाई हम ऑफ पुश बटन के आउटपुट 7 नंबर से निकाले या ON पुश बटन के इनपुट 8 नंबर से निकाले

और कांटेक्टर के NO पॉइंट 12 नंबर पर दे और उसके आउटपुट 13 नंबर से निकलकर ऑन पुश बटन से आउटपुट 9 नंबर पर लगा दे

अब जब आप ऑन पुश बटन को दबाएंगे तो एक बार कांटेक्टर ऑन होगा और जैसे ही कांटेक्टर ऑन होगा तो तुरंत कांटेक्टर का NO कांटेक्ट NC में बदल जायेगा और सप्लाई जो 12 नंबर पर आ रही थी

वह 13 नंबर से निकलकर 9 नंबर पर पहुंच कर कांटेक्टर को होल्ड करा देगी जिससे कांटेक्टर परमानेंट ON ही रहेगा (इसी सप्लाई को होल्डिंग सप्लाई कहते है) जब तक आप पुश बटन से कांटेक्टर को ऑफ न कर दे।

Dol starter की पावर ड्राइंग

DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए?

इसमें 3 फेज सप्लाई सबसे पहले MCB के इनपुट में जायेगा और फिर MCB के आउटपुट से सप्लाई निकलकर कांटेक्टर के इनपुट L1 L2 L(लाइन 1, लाइन 2, लाइन 3) में आएगा

और कांटेक्टर के आउटपुट T1 T2 T(टर्मिनल 1, टर्मिनल 2, टर्मिनल 3) से निकलकर ओवरलोड रिले के इनपुट में जाएगा और ओवरलोड रिले के आउटपुट से निकलकर सीधा मोटर के टर्मिनल में पहुंच जायेगा।

Dol starter मोटर कनेक्शन

दोस्तों Dol starter में मोटर का कनेक्शन दो प्रकार से किया जाता है। इसमें पहला स्टार कनेक्शन और दूसरा डेल्टा कनेक्शन तो आइए इन कनेक्शन को एक-2 करके समझते हैं।

1- स्टार कनेक्शन- दोस्तों Dol starter में सबसे मुख्य कनेक्शन स्टार कनेक्शन होता है सबसे ज्यादा इसी में मोटर का कनेक्शन किया जाता है

इस कनेक्शन में सबसे मुख्य रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है की स्टार्टर से निकलकर जो तीन फेज आते है तो उसको हम मोटर के साथ कैसे कनेक्ट करें

क्योंकि मोटर के टर्मिनल पर एक कनेक्शन प्लेट लगी होती है उसमें मोटर के अंदर से 6 वायर की लीड निकलती हैं

जब आप प्लेट को देखेंगे तो उसमें U1 V1 W1 और उसके नीचे U2 V2 W2 लिखा होता है और इन्हीं में आपको थ्री फेज देना होता है

लेकिन इसमें यह कन्फ्यूजन होती है कि 6 कनेक्शन टर्मिनल होते हैं और सप्लाई के लिए 3 फेज की यानी 3 तार होते हैं तो कनेक्शन कैसे करें जब मोटर का कनेक्शन स्टार में करते हैं

इसमें U1 U2 एक क्वायल, V1 V2 एक क्वायल और W1 W2 एक क्वायल है

अब सबसे पहले हम स्टार में कनेक्शन करने के लिए या तो U1 V1 Wको एक स्ट्रिप से शार्ट कर दे मतलब तीनो क्वायल का एक सिरा शार्ट कर दे और बाकी बचे U2 V2 W2 में 3 फेज RYB कनेक्ट कर दे

या U2 V2 Wको शार्ट कर दे और U1 V1 W1 में 3 फेज RYB कनेक्ट कर दे तो मोटर स्टार में चलने लगेगी। इसमें मोटर का कनेक्शन करने पर मोटर में जाने वाली जो हाई करंट है वह कंट्रोल हो जाती है

इस कनेक्शन का उपयोग सामान्य रूप से 0 से 7.5 हॉर्स पावर की मोटर में ही किया जाता है।

नोट- इस कनेक्शन में सिर्फ और सिर्फ इतना ही मुख्य रूप से ध्यान देना है की मोटर की एक क्वायल को केवल 230 वोल्ट ही देना है इससे ना कम और ना इससे ही ज्यादा।

2- डेल्टा कनेक्शन- इस कनेक्शन में 3 कोर की 1 केबल का उपयोग किया जाता है इसमें RYB तीनो फेज आते है।

डेल्टा कनेक्शन छोटी मोटरों के लिए नहीं होता है परन्तु ऐसा भी नहीं है की डेल्टा कनेक्शन छोटी मोटर में नहीं कर सकते है

यह कनेक्शन मोटर पर कितना प्रतिशत लोड है इस पर निर्भर करता है।

इस कनेक्शन का उपयोग बड़ी मोटरों में किया जाता है क्योंकि जैसा मैंने आपको ऊपर बताया की मोटर की टर्मिनल प्लेट पर U1 U2 V1 V2 W1 W2 लिखा होता है

जब मोटर को डेल्टा में कनेक्शन करना होता है तो सबसे पहले आपको दिमाग में यह रखना है की इसमें मोटर की एक क्वायल को 415 वोल्ट देना है

तो अब जैसा की ऊपर बताया की U1 U2 एक क्वायल, V1 V2 एक क्वायल और W1 W2 एक क्वायल है

तो U1 को R फेज दे और इस क्वायल के दूसरे सिरे U2 में B फेज दे तो इस तरह से U1 Uएक क्वायल को 415 वोल्ट मिल जायेगा।

अब V1 V2 में V1 को Y फेज दे और इस क्वायल के दूसरे सिरे V2 में R फेज दे तो इस तरह से V1 V2 एक क्वायल को 415 वोल्ट मिल जायेगा और अंतिम में W1 W2 में W1 को B फेज दे

और इस क्वायल के दूसरे सिरे W2 में Y फेज दे तो इस तरह से W1 W2 एक क्वायल को 415 वोल्ट मिल जायेगा।

नोट- इस कनेक्शन में सिर्फ इतना ही प्रमुख रूप से ध्यान देना है की मोटर की एक क्वायल को केवल 415 वोल्ट ही देना है इससे ना कम और ना ही इससे ज्यादा।

DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए?

कब मोटर का कनेक्शन स्टार में करे और कब डेल्टा में-

अगर मोटर का कनेक्शन डेल्टा में कर दिया तो चूकी मैंने आपको ऊपर बताया की मोटर की एक क्वायल को 415 वोल्ट यानी 2 फेज देते है

तो मोटर के स्टेटर में ज्यादा मैग्नेटिक फील्ड बनेगी और उस समय मोटर पर लोड कम डाला गया है तो मोटर की एफिशिएंसी कम हो जाएगी

इसको एक उदाहरण से समझते है की अगर कोई 10 हॉर्स पावर की मोटर है और उसका कनेक्शन अगर डेल्टा में है तो उस मोटर पर कम से कम 60 से 70% लोड तो होना ही चाहिए

अगर लोड 20 से 30% ही है तो मोटर की एफिशिएंसी बहुत ही कम हो जाएगी और मोटर में लॉसेस बहुत ही बढ़ जायेंगे मतलब 10 हॉर्स पावर की मोटर का फुल लोड करेंट 15 एम्पेयर है

पर अगर क्लैंप मीटर से करंट नापने पर 10 से 11 एम्पेयर आ रहा है तब तो मोटर को डेल्टा में चलने दे परन्तु अगर 5 से 6 एम्पेयर आ रहा है तो तुरंत मोटर का कनेक्शन स्टार में कर दे।

Dol starter का कनेक्शन करने में सावधानी

स्टार्टर में जो पुश बटन लगे होते हैं उनका कनेक्शन अच्छी प्रकार से करना चाहिए। वायर को अच्छे से टाइट करें जिससे कनेक्शन ढीला ना रह जाए

क्योंकि कनेक्शन अगर ढीला रह गया तो स्टार्टर प्रॉपर तरीके से काम नहीं करेगा।

कनेक्शन करते समय जितनी जरूरत हो उतना ही वायर का उपयोग करें क्योंकि अधिक वायर जब आप ले लेते हैं तो बढे हुए वायर की ड्रेसिंग नहीं हो पाती।

मोटर का कनेक्शन करने के बाद मोटर को चला करके एक बार जरूर देख ले क्योंकि 3 फेज की मोटर में फेज सिक्वेंस होता है

जिसकी वजह से मोटर उल्टी भी घूम सकती है अगर मोटर उल्टी दिशा में घूम रही है तो MCB के इनपुट या  कांटेक्टर के इनपुट से RYB थ्री फेज के वायर में किन्ही दो फेज को आपस में बदल दे।

जैसे यदि RYB का कनेक्शन किया हुआ है तो मोटर उल्टी चल रही है तो चाल पलटने के लिए जिससे मोटर सीधी चले MCB या कांटेक्टर कि जो इनपुट सप्लाई है

वहां पर Y के स्थान पर B और B के स्थान पर Y, या  R के स्थान पर B और B के स्थान पर R, या Y के स्थान पर R और R के स्थान पर Y का कनेक्शन कर दें कुल मिलाकर किन्ही दो फेजों को इंटरचेंज कर दें।

Dol starter से लाभ

1- यह स्टार्टर अन्य स्टार्टर की तुलना में बहुत सस्ता पड़ता है।

2- इसे चलाना बहुत ही आसान है और इसका मेंटेनेंस भी काफी सस्ता है।

3- इसका कंट्रोल सर्किट और पावर सर्किट बनाना बहुत ही आसान है।

4- चूंकि इसकी सर्किट बहुत ही आसान है इसलिए इसमें किसी फाल्ट को खोजना बहुत ही आसान होता है।

5- इस स्टार्ट से जैसे ही मोटर स्टार्ट होती है तो वह 100% टार्क से चलती है।

      Dol starter से हानि

1- इस स्टार्टर से मोटर की स्टार्टिंग करंट को कम नहीं किया जा सकता।

2- जब मोटर स्टार्ट होती है तो वह अपने फुल लोड करंट का 8 से 10 गुना करंट लेती है।

3- स्टार्टर को जब स्टार्ट किया जाता है तो इसकी लाइन वोल्टेज बहुत कम हो जाती है।

4- स्टार्टर से जब मोटर को चलाते हैं तो उसका स्टार्टिंग टार्क बहुत ज्यादा होता है मतलब जहां पर कम टार्क की जरूरत हो वहां के लिए यह स्टार्टर उपयुक्त नहीं है।

निष्कर्ष

दोस्तों इस पोस्ट में आप लोगो ने DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए?, कब मोटर का कनेक्शन स्टार में करे और कब डेल्टा में के बारे में जाना Dol starter क्या होता है।

इसकी वायरिंग हम कैसे करते हैं, इसमें कितने प्रकार की वायरिंग होती है, जब Dol starter बन जाता है उसके बाद हम मोटर का कनेक्शन कैसे करते हैं।

Dol starter में कितने प्रकार से मोटर का कनेक्शन होता है, Dol starter का वर्किंग प्रिंसिपल क्या होता है, इसकी ड्राइंग कैसे बनती है, इसका फायदा क्या है और नुकसान क्या है।

Dol starter का कनेक्शन करते समय हमें क्या-2 सावधानी बरतनी चाहिए और भी कई प्रश्नों का उत्तर इस पोस्ट में आप ने जाना। फिर भी आपका कोई प्रश्न है उसे जरूर कमेंट मैं उसका उत्तर जरूर देने का प्रयास करूँगा।

यह भी पढ़े।

1- अर्थिंग क्यों किया जाता है?


अब भी कोई सवाल आप के मन में हो तो आप इस पोस्ट के नीचे कमेंट करके पूछ सकते है या फिर इंस्टाग्राम पर rudresh_srivastav” पर भी अपना सवाल पूछ सकते है।

अगर आपको इलेक्ट्रिकल की वीडियो देखना पसंद है तो आप हमारे चैनल target electrician  पर विजिट कर सकते है। धन्यवाद्

DOL स्टार्टर का उपयोग कब करना चाहिए? से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (Mcq)-

1- Dol starter स्टार्टर कैसे काम करता है?

Dol स्टार्टर इस स्टार्टर में मोटर फुल लोड पर चलाई जाती है इसमें मोटर का स्टार्टिंग टार्क ज्यादा होता है इसमें मोटर को मिलने वाला करंट उसके फुल लोड करंट का 8 से 10 गुना होता है। इसमें 5 से 7.5 हॉर्स पावर से ऊपर की मोटर नहीं चलानी होती है।

2- स्टार्टर क्यों लगाया जाता है?

कोई भी मोटर जब स्टार्ट होती है तो वह आपने फुल लोड करंट का 8 से 10 गुना ज्यादा करंट लेती है और अगर यह हाई करंट मोटर की वाइंडिंग को सीधे दे दिया जाए तो मोटर की वाइंडिंग जल सकती है स्टार्टर इसी स्टार्टिंग करंट को कंट्रोल करने का काम करता है।

3- मैं डायरेक्ट ऑनलाइन स्टार्टर का उपयोग कहां कर सकता हूं?

जहां पर कम पावर की मोटर का उपयोग किया जाता है 7.5 एचपी की मोटर ही इस स्टार्टर से चलाई जाती है जहां पर हाई स्टार्टिंग टॉर्क की जरूरत होती है वहां पर इस स्टार्टर का उपयोग किया जाता है।

4- स्टार्टर के कितने भाग होते हैं?

Dol starter में एमसीबी एक पोल और तीन पोल, कांट्रेक्टर, ऑन पुश बटन, ऑफ पुश बटन, ओवरलोड रिले आदि।

5- क्या आप बिना स्टार्टर के मोटर शुरू कर सकते हैं?

किसी मोटर को बिना स्टार्टर की नहीं चलाना चाहिए क्योंकि मोटर में जाने वाली जो स्टार्टिंग करंट होती है वह बहुत ज्यादा होती है और यदि आप स्टार्टर का उपयोग नहीं करेंगे तो वह करंट चीजें मोटर में चली जाएगी जिससे आप की मोटर जल्दी सकती है।

मेरा नाम आर के श्रीवास्तव है इस ब्लॉग में आपको इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से संबंधित सभी प्रकार की रोचक जानकारी मिलेगी, जिससे आप रोज नई-नई जानकारी सीख पाएंगे। आपके मन में किसी भी प्रकार का कोई भी प्रश्न/कंफ्यूजन है तो उसे कमेंट सेक्शन में जाकर जरूर कमेंट करे मैं जल्द से जल्द उस प्रश्न/कंफ्यूजन का उत्तर दूंगा और आपकी कंफ्यूजन को दूर करने का पूरा प्रयास करूंगा। धन्यवाद्