VFD क्या है और इसका कार्य क्या है?

आपने VFD को देखा होगा तो VFD को लेकर आपके मन में प्रश्न जरूर आया होगा की VFD क्या है और इसका कार्य क्या है? क्योकि आज के समय में VFD से ही हर एक मोटर को चलाया जा रहा है।

VFD अपनी इनपुट सप्लाई की फ्रीक्वेंसी को कम ज्यादा करके मोटर की स्पीड को कंट्रोल करता है क्योकि VFD का fullform (Variable Frequency Drive) होता है।

कोई मोटर सिंगल फेज की हो या थ्री फेज की उससे बेस्ट परफॉर्मेंस यदि आप को लेना है तो उस मोटर को VFD से चलना चाहिए। VFD के उपयोग से मोटर से हम जैसा चाहे वैसा काम ले सकते है।

घरों में motor की जरूरत होती ही है चाहे वह पानी की मोटर हो या फिर कोई दूसरे काम के लिए हो motor हर घर में होता है।

motor को चलाने के लिए MCB, DP Switch या Starter इस तरह के इलेक्ट्रिकल उपकरणों का प्रयोग करते हैं लेकिन काफी जगह पर आपने VFD लगा हुआ देखा होगा।

VFD क्या है और इसका कार्य क्या है?VFD क्यों लगाते है?

मोटर स्टार्टिंग के समय बहुत ज्यादा करंट लेती है लगभग 8 से 10 गुना जिसकी वजह से मोटर की वाइंडिंग के जलने का खतरा होता है इस हाई करंट से मोटर की वाइंडिंग को बचाने के लिए DOL स्टार्टर, स्टार डेल्टा स्टार्टर, रिवर्स फॉरवर्ड स्टार्टर का उपयोग किया जाता है।

स्टार्टर की मदद से हाई करंट को तो कंट्रोल कर लेते हैं लेकिन मोटर को स्टार्ट करते ही वह तुरंत फुल स्पीड पर चलता है जिसके कारण मोटर से जुड़े बेयरिंग और मशीन में यांत्रिक क्षति होने की संभावना होती है।

अब अगर यहां पर VFD को लगाते हैं तो हम आसानी से इन सभी समस्याओं से बच सकते हैं और इसमें हमे किसी प्रकार के जटिल सर्किट को भी नहीं बनाना पड़ेगा।

जहां पर लोड की स्थिति बदलती रहती है या बार-2 मोटर को बंद और चालू होना पड़ता है तो ऐसी जगह पर VFD का प्रयोग अधिक किया जाता है।

यह भी पढ़े-

1- सिंगल फेज की मोटर का कनेक्शन कैसे होता है?

2- मेरे बिजली के बिल में पावर फैक्टर क्या है?

VFD क्या है और इसका कार्य क्या है?

VFD को AC सप्लाई दी जाती है तब वह उसे रेक्टिफायर की सहायता से AC को DC में बदल देता है फिर यह DC पावर आगे फिल्टर सेक्शन में जाता है।

हम AC सप्लाई में परिवर्तन नहीं कर सकते इसका कारण AC सप्लाई की फ्रीक्वेंसी है इसी लिए इसमें परिवर्तन करना कठिन है पर यदि AC सप्लाई को DC सप्लाई में बदल दिया गया।

अब चूँकि DC सप्लाई में फ्रीक्वेंसी नहीं होती केवल एक सीधी लाइन होती है तो चूँकि हम जानते है की टेढ़ी मेढ़ी लाइन में परिवर्तन करना कठिन है पर सीधी लाइन को हम जैसे चाहे मोड़ सकते है

तो DC सप्लाई में एक सीधी लाइन होती है अब इस सीधी लाइन को हम अपनी जरुरत के अनुसार फ्रीक्वेंसी में बदल सकते है।

यहां से डिमांड को पूरा करने के लिए आवश्यक पावर इन्वर्टर में जाती है यहाँ इनवर्टर DC को जरूरत के अनुसार परिवर्तित फ्रीक्वेंसी के साथ AC में बदलकर मोटर को दे देता है।

VFD मोटर की स्पीड को कैसे कण्ट्रोल करता है?

AC मोटर के RPM का फॉर्मूला N=120F/P होता है।
N- मोटर का RPM
F- फ्रीक्वेंसी
P- पोलो की संख्या
इस फॉर्मूला से यह पता चल रहा है कि मोटर की गति सप्लाई फ्रीक्वेंसी के समानुपाती हैं जिसका मतलब है की जैसे-2 फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी वैसे-2 मोटर की स्पीड भी बढ़ेगी अगर फ्रीक्वेंसी कम होगी तो मोटर की स्पीड भी कम होगी।
उदाहरण:- मान लीजिए कि 50Hz की फ्रीक्वेंसी पर 6 पोल के एक मोटर को चलाया जाता हैं तब N =120×50/6
अतः N= 1000 rpm होगा।
यदि फ्रीक्वेंसी को 40Hz कर दिया जाए तो N=120×40/6
अतः N= 800 rpm हो जायेगा।
अगर फ्रीक्वेंसी को 30Hz कर दिया जाए तो N=120×30/6
अतः N= 600 rpm हो जायेगा।
 VFD के पैरामीटर में फ्रीक्वेंसी को अपने मुताबिक बदलकर मोटर की गति को नियंत्रित कर सकते है।

VFD लगाने का फ़ायदा

  • VFD को लगाने से पावर फैक्टर कण्ट्रोल में रहता है।
  • VFD के उपयोग से मोटर में होने वाले लगभग सभी प्रकार के दोषों से सुरक्षा मिल जाती है।  जैसे- शार्ट सर्किट, अर्थ  लीकेज, ओवर लोड, सिंगल फेसिंग, ओवर लोड प्रोटेक्शन, फेज असंतुलन, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, ओवर वोल्टेज,
  • VFD की सहायता से हम मोटर को आसानी से कम स्पीड के साथ चालू और बंद कर सकते है। जिससे टूट फूट होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।
  • VFD लगाने के बाद अलग से कोई स्टार्टर या स्पीड कंट्रोलर लगाने की कोई जरुरत नहीं होती है।
  • VFD की मदद से मोटर को सीधा व उल्टा चला सकता है कनेक्शन को बिना बदले।
  • VFD इलेक्ट्रिसिटी की बहुत बचत करता है।
  • यदि स्टार्टर से मोटर को चला रहे थे और उसे हटाकर VFD लगाते है तो VFD को खरीदने की कीमत आप VFD से एनर्जी सेविंग करके 1 साल में निकाल लेंगे।
  • VFD का उपयोग मशीनों की फ्रीक्वेंसी, वोल्टेज और RPM को कंट्रोल करने में किया जाता है जब हम मोटर को स्टार्टर की सहायता से चालू करते है तो मोटर एक झटके के साथ स्टार्ट होती है पर कभी-2 मोटर को हमें स्मूथ स्टार्ट करने की जरुरत होती है तो वह स्मूथ स्टार्ट हमें VFD से ही मिल सकता है VFD मोटर को जो करंट देती है उसे वह स्मार्ट तरीके से कण्ट्रोल करती है जिससे मोटर का जीवनकाल बढ़ जाता है।
  • VFD दो प्रकार के होते है AC VFD और DC VFD

यह भी पढ़े:-

1- 3 फेज को मोटर से कैसे कनेक्ट करें?

VFD लगाने का नुकसान

  • VFD काफी महंगा होता है।
  • VFD के कारण से हार्मोनिक उत्पन्न होता है।
  • VFD के कारण मोटर में वाइब्रेशन बढ़ जाता है।
  • वाइब्रेशन बढ़ने से शोर बढ़ता है।
  • VFD से केबल गर्म होने लगती है।
  • VFD और मोटर के बीच की दूरी 500 मीटर तक ही रखी जा सकती है।

AC VFD

AC VFD इस प्रकार से काम करती है की जब हम VFD में AC सप्लाई देते है तो AC VFD उस AC सप्लाई को DC में बदल देता है और फिर उस DC को AC में बदल देता है लेकिन जब DC को AC में बदलता है।

तब यह VFD फ्रीक्वेंसी और वोल्टेज दोनों को बदल देता है और यही बदलाव मोटर की स्पीड को बदल देता है।

Speed हमेशा Frequency के समानुपाती होती है तो जैसे ही Frequency बढ़ेगी उसी तरह मोटर की स्पीड भी बढ़ जाएगी और जैसे ही Frequency कम होगी स्पीड भी कम हो जायेगी।

DC VFD

DC VFD से मोटर की गति को नियंत्रित करना होता है डीसी सप्लाई में फ्रीक्वेंसी नहीं होती इसीलिए DC मोटर के अंदर गति को नियंत्रित करने के लिए आर्मेचर वाइंडिंग और फील्ड वाइंडिंग के में जो करंट और वोल्टेज जा रहे होते हैं।

उनको कम ज्यादा करके डीसी मोटर की गति को कम या फिर ज्यादा किया जा सकता है।

इसके साथ-2 VFD में वोल्टेज को सेट करके रखा जाता हैं और कुछ सुरक्षा भी इसके अंदर दी जाती है।

VFD के मुख्य भाग

VFD में प्रमुख रूप से तीन भाग होते है।

रेक्टिफिएर यूनिट-

जब हम थ्री फेज पावर सप्लाई VFD में देते हैं तो उसमे पहले रेक्टिफायर सेक्शन में रेक्टिफायर सर्किट होता है जो Ac को Dc में बदलता है।

फ़िल्टर यूनिट-

इसमें capacitor होता है जो Dc से उत्पन्न रिपल्स को ख़तम करता है , क्योंकि जब Ac को रेक्टिफायर सेक्शन में डायरेक्ट करंट में बदलते है तो ये पूरी तरह से Dc में नहीं बदलता है, इसीलिए कुछ रिपल्स उत्पन्न होते है।

इन्वर्टर यूनिट-

इसमें फ़िल्टर यूनिट से शुद्ध दस सप्लाई आता है, जिसमे Dc को Ac सप्लाई में बदला जाता है। जो हमे आउटपुट पर मिलता है।

VFD और मोटर स्टार्टर में क्या अंतर है?

यदि स्टार्टर से मोटर को चलाते है या उसे इलेक्ट्रिक सप्लाई देते है तो मोटर एक ज़र्क (झटका) के साथ स्टार्ट होती है इस प्रकार से मोटर जब स्टार्ट होती है तो इसे मोटर का सामान्य तरीके से स्टार्ट होना कहते है।

इस तरह से जब मोटर को स्टार्ट किया जाता है तो वह मोटर जो कार्य कर रही होती है वह कोई विशेष कार्य नहीं होगा परन्तु कही- 2 पर मोटर को स्मूथ तरीके से चालू व बंद करना होता है।

मोटर को कुछ ही समय तक चला कर बंद करना होता है या कुछ विशेष प्रकर का ऑपरेशन लेना होता है तो ऐसी जगह पर VFD का उपयोग करते है।

VFD से जैसी जरुरत हो उसी प्रकार से मोटर को चला सकते है। लेकिन आप स्टार्टर से अगर मोटर को चलाते है तो आप इस तरह का कार्य नहीं कर सकते है।

VFD को कहाँ पर लगाते है?

VFD को उस स्थान पर लगाते है जहाँ पर मोटर से कोई विशेष कार्य लेना होता है जैसे मोटर को हाफ राउंड घूमना हो किसी विशेष एंगल पर मोटर को चलाना हो।

या पूरे कार्य को आटोमेटिक तरीके से करना हो या एनर्जी सेविंग करनी हो। किसी जगह पर मोटर बार-2 जल जाती हो तो उसे जलने से बचाने के लिए VFD का उपयोग करते है।

Vfd बनाने वाली प्रमुख कंपनी

  1. Abb लिमिटेड
  2. क्रॉम्पटन ग्रीव्स लिमिटेड
  3. Danefoss
  4. EatonCorp
  5. Alen Bradley

निष्कर्ष

यहाँ से मै यह निष्कर्ष निकाल सकता हूँ की आप को  VFD full form, VFD working principle, VFD क्या है और इसका कार्य क्या है? को विस्तार से समझ गए होंगे इस पोस्ट से काफी जानकारी मिल गई होगी की यदि आप मोटर को सप्लाई देनी है

और यदि आप ये सोच रहे है की आपके मोटर की लाइफ अच्छी रहे, एनर्जी सेविंग भी हो, पावर फैक्टर अच्छा रहे, मोटर को जैसे चाहे जैसी जरुरत हो वैसा ऑप्रेशन ले पाए तो इसके लिए आप VFD का उपयोग कर सकते है।

नोट- यह भी पढ़े।

1- इन्वर्टर में बैटरी का कनेक्शन

2- सौर पैनल के 3 प्रकार क्या हैं?


अब भी कोई सवाल आप के मन में हो तो आप इस पोस्ट के नीचे कमेंट करके पूछ सकते है या फिर इंस्टाग्राम पर rudresh_srivastav” पर भी अपना सवाल पूछ सकते है।

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VFD क्या है और इसका कार्य क्या है? से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (Mcq)-

1- VFD कैसे काम करता है?
VFD Ac सप्लाई को Dc में बदलता है और फिर उस Dc सप्लाई को Ac में बदल देता है। फिर VFD से हम मोटर के Rpm को अपने अनुसार कम व ज्यादा कर सकते हैं।

2- हम वीएफडी का उपयोग क्यों करते हैं?
VFD का फुल फॉर्म “वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव” होता है इसकी सहायता से Ac सप्लाई की फ्रीक्वेंसी को मैनेज करके मोटर की स्पीड को घटा व बढ़ा सकते हैं।

3- वीएफडी कितने प्रकार के होते हैं?
सामान्य रूप से VFD तीन प्रकार के होते हैं जिसमें से पहला वोल्टेज सोर्स इनवर्टर (VSI), दूसरा करंट सोर्स इनवर्टर (CSI),और तीसरा पल्स विड्थ मॉड्यूलेशन इनवर्टर (PWM)

4- वीएफडी के 4 भाग क्या हैं?
VFD के प्रमुख चार भाग होते है पहला रेक्टिफायर, दूसरा Dc बस/फिल्टर, तीसरा इनवर्टर और चौथा कंट्रोल यूनिट होता है।

मेरा नाम आर के श्रीवास्तव है इस ब्लॉग में आपको इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से संबंधित सभी प्रकार की रोचक जानकारी मिलेगी, जिससे आप रोज नई-नई जानकारी सीख पाएंगे। आपके मन में किसी भी प्रकार का कोई भी प्रश्न/कंफ्यूजन है तो उसे कमेंट सेक्शन में जाकर जरूर कमेंट करे मैं जल्द से जल्द उस प्रश्न/कंफ्यूजन का उत्तर दूंगा और आपकी कंफ्यूजन को दूर करने का पूरा प्रयास करूंगा। धन्यवाद्